मोरंगे

 

मोरंगे : एक परिचय


‘मोरंगे’ ग्रामीण शिक्षा केन्द्र, सवाई माधोपुर द्वारा प्रकाशित बच्चों के रचनात्मक लेखन की मासिक पत्रिका है। जुलाई 2009 से प्रकाशित इस पत्रिका के अब तक आठ अंक प्रकाशित हो चुके हैं। ग्रामीण शिक्षा केन्द्र, सवाई माधोपुर की चार उदय सामुदायिक पाठषालाओं के बच्चों के रचनात्मक लेखन और कला के काम की इसमें नियमित प्रस्तुति होती है।

 

मोरंगे का उद्देश्य

 

‘मोरंगे‘ के उद्देश्य निम्न हैं-

1. बच्चों और शिक्षकों में साहित्य और कला के प्रति सुरुचि विकसित करना।
2. बच्चों में रचनात्मक लेखन और कला (चित्रकला) की क्षमताओं का विकास करना।
3. ‘मोरंगे’ पत्रिका के मासिक प्रकाशन के जरिए बच्चों और शिक्षकों के रचनात्मक लेखन और कला के प्रकाशन के अवसर बनाना।
4. रचनाषीलता पर नियमित संवाद के अवसर बनाना।
5. बच्चों और शिक्षकों की कला-दृष्टि को उस मुकाम तक पहुंचाने का प्रयास करना जहां वे स्व-प्रेरणा से व स्वतःस्फूर्त ढंग से पठन-पाठन, लेखन और कला-कार्य को अपने जीवन का हिस्सा बना लें।
6. जीवन के प्रति गहरे-राग, संवेदनशीलता और सौन्दर्यबोध का विकास करना।

 

काम की प्रक्रिया

 

उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम के निम्न चरण अपनाए जाने की योजना बनायी गई-

1 समूहों में बच्चों के साथ साहित्य और कला पर काम करना।
2 शिक्षकों के क्षमता विकास के लिए महीने में एक दिन की कार्यशाला करना।
3 समूहों में हुए काम का संकलन, चयन और सम्पादन करना।
4 मोरंगे का प्रकाशन व प्रकाशित अंक का समूहों में वितरण।
5 समूहों में बच्चों व शिक्षकों द्वारा मोरंगे का पठन-पाठन, रचनाओं पर विचार-विमर्श। 6 बच्चों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं पर संवाद करना।

 

अपेक्षाएं

1 बच्चों में रचनात्मक लेखन और कला की क्षमताओं का विकास होगा।
2 शिक्षकों में रचनात्मक लेखन और कला की क्षमताओं का विकास होगा।
3 बच्चों और शिक्षकों में आलोचनात्मक क्षमता का विकास होगा।
4 बच्चे रचना चयन, सम्पादन प्रकाशन आदि प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे।
5 मोरंगे टीम में सम्पादन की क्षमता का विकास होगा।

 

संक्षेप में यह कि ‘मोरंगे’ के तय किए उद्देश्यों की दिशा में बढ़ सकेंगे।